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अवैध खनन के संक्रमण पर चिट्ठी आक्रमण

@सौरभ द्विवेदी, विश्लेषक

सरकार द्वारा घोषित पिछड़े जनपद चित्रकूट में अवैध खनन अग्रिम पंक्ति में सुनने को मिलता है , जैसे कोरोना वायरस की धमक वैसे ही खनन वायरस की धमक जारी है।कोरोना वायरस के संक्रमण से जितने परिचित हैं आप। उतने ही परिचित अवैध खनन के संक्रमण से भी हैं। जिस प्रकार से कोरोना वायरस के संक्रमण को समाप्त करना बड़ी चुनौती है। यह ठीक वैसी ही चुनौती है कि अवैध खनन का संक्रमण समाप्त होता ही नहीं। 

जैसे वायरस चुपके से हमला करता है वैसे ही प्रकृति पर माफिया वायरस हमलावर हैं परंतु अवैध खनन की वैक्सीन बनकर एक जिलाध्यक्ष सामने आए हैं। जहाँ प्रशासन कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहा है। हाटस्पाट के बार्डर पर पहुंच रहा है और तस्वीरों मे मुस्तैदी नजर आ रही है , वहीं माफिया वायरस भी चर्चा मे आ गए हैं। हाल ही में कोरोना से तेज रफ्तार पर अवैध खनन की चर्चा जोरो पर रही। 

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खबर और चर्चा के बीच भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश खरे ने जिला प्रशासन को अवगत कराया तत्पश्चात एक चिट्ठी मुख्यमंत्री को भेजकर बड़ा आक्रमण किया है। 

जैसे वो कहना चाहते हों कि "मैं अवैध खनन नहीं होने दूंगा।" इसलिए उन्होंने जिला खनिज अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चूंकि उक्त खनिज अधिकारी पहले भी चित्रकूट जनपद में रह चुके हैं। खूब चर्चा मे भी रहे और वापस आने के साथ ही चर्चा में उनका नाम एक मीटर की दूरी से भी हवा में तैरने लगा। 

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चर्चा इस बात की भी रही कि इनकी वापसी से कुछ खास तत्वों का मन गुलाब हो गया और उनको अपने उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें नजर आने लगीं। जिलाध्यक्ष के पत्र पर लिखी हुई भाषा भी इस ओर खूब इशारा करती है। 

यह सच है कि अवैध खनन नाम संक्रमण कोरोना वायरस से भी पहले का संक्रमण है। यह हमेशा की बात है कि इस संक्रमण पर रोक लगाने की बात की जाती है पर सचमुच कोरोना वायरस की तरह ही ताकतवर हैं , ये अवैध खनन माफिया संक्रमण समूह। 

ये इतने ही ताकतवर हैं जितना की कोरोना वायरस। चूंकि जिस प्रकार से कोरोना वायरस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा वैसे ही अवैध खनन माफिया संक्रमण पर भी नियंत्रण नहीं हो सका। अब देखना यह है कि चिट्ठी की दवा कितनी कारगर होती है। चिट्ठी का आक्रमण कितना असरकारी होता है। वैसे मुख्यमंत्री चित्रकूट जनपद मे हो रहे अवैध खनन की ओर आंख तरेर भर दें तो यह खनन वायरस सैनेटाइजर से बीस सेकंड में खत्म हो जाएगा।

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यह भी स्पष्ट है कि जिलाध्यक्ष की मंशा साफ है व वह नदी प्रेमी हैं और सामाजिक हित के काम हमेशा करते रहे हैं। अतः बड़ी आशा है कि खनन माफिया वायरस का सैनेटाइजेशन शीघ्र हो जाएगा।

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