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कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप और बिगड़ती आर्थ"/>

राज्य कर्मचारियों पर एस्मा की लटकती तलवार 

लखनऊ,

कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप और बिगड़ती आर्थिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सचिवालय भत्ते सहित आठ तरह के भत्ते खत्म कर दिए थे जिससे सचिवालय से जुड़े सभी सेवा संगठनों ने सचिवालय समन्वय समिति बनाकर इसके खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है। कर्मचारियों ने विरोध के लिए काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक विरोध जताया। सरकार ने हड़ताल के खतरे को भांपते हुए कर्मचारियों पर एस्मा की तलवार लटका दी है।

बताते चलें कि कर्मचारियों ने भक्तों को समाप्त करने के खिलाफ कल प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया था।कर्मचारियों का यह विरोध सरकार को नागवार गुजरा और सरकार ने तत्काल प्रभाव से आवश्यक सेवा अनुश्रवण कानून एस्मा लागू करते हुए सभी विभागों में अगले 6 महीने के लिए हड़ताल पर रोक लगा दी है।यह आदेश अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक मुकुल सिंघल ने लगाते हुए चेतावनी दी है कि अगर हड़ताल पर रोक के  बावजूद कर्मचारी संगठन आंदोलन पर अडिग रहते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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काली पट्टी बांधकर  विरोध
सरकार द्वारा कई भक्तों को समाप्त कर दिए जाने से नाराज तमाम कर्मचारी संगठनों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध शुरू किया है और आगे आंदोलन की चेतावनी भी दी है।वर्तमान समय कोविड-19 के कारण सरकार के सामने तमाम चुनौतियां हैं ।ऐसे में राज कर्मचारियों द्वारा विरोध की चेतावनी से सरकार की चिंता बढ़ गई थी इसीलिए सरकार ने इन विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह से रोक के लिए अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम 1966 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हड़ताल पर रोक लगाई है।

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एस्मा का विरोध
राज्य कर्मचारियों द्वारा हड़ताल पर रोक लगाने के लिए एस्मा कानून को लागू करने पर असंतोष व्यक्त किया ।उनका मानना है कि कर्मचारी संगठनों ने जब किसी तरह की हड़ताल की नोटिस नहीं दी तो एस्मा लगाने का क्या औचित्य है। 

क्या है एस्मा कानून
एस्मा संसद द्वारा पारित अधिनियम है, जिसे 1968 में लागू किया गया था।इसके जरिये हड़ताल के दौरान लोगों के जनजीवन को प्रभावित करने वाली अत्यावश्यक सेवाओं की बहाली सुनिश्चित कराने की कोशिश की जाती है।इसमें अत्यावश्यक सेवाओं की एक लंबी सूची है, जिसमें सार्वजनिक परिवहन (बस सेवा, रेल, हवाई सेवा), डाक सेवा, स्वास्थ्य सेवा (डॉक्टर एवं अस्पताल) जैसी सेवाएं शामिल हैं। हालांकि राज्य सरकारें स्वयं भी किसी सेवा को अत्यावश्यक सेवा घोषित कर सकती हैं।एस्मा लागू हो जाने के बाद हड़ताली कर्मचारियों को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें कारावास और जुर्माने का भी प्रावधान है।

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